पर्यावरण ·

समुद्रों में प्लास्टिक: मछली पकड़ने के जाल का कितना योगदान?

मछली पकड़ने के उपकरण, जो अक्सर 'भूतिया जाल' के रूप में जाने जाते हैं, समुद्री प्रदूषण का एक बड़ा और अनदेखा कारण हैं, जो हमारे महासागरों और तटीय समुदायों को प्रभावित करते हैं।

1,118 शब्द · Veg.ac का दैनिक लेख
समुद्र तट पर फंसा हुआ मछली पकड़ने का जाल
Wikipedia · Fish farming

जब हम समुद्र में प्लास्टिक प्रदूषण के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर हमारे मन में बोतलों, बैगों और अन्य एकल-उपयोग वाली वस्तुओं की छवियां आती हैं। हालांकि ये निश्चित रूप से एक समस्या हैं, लेकिन समुद्री कचरे का एक बड़ा और अधिक हानिकारक हिस्सा मछली पकड़ने के गियर से आता है। ये 'भूतिया जाल' - खोए हुए, छोड़े गए या परित्यक्त मछली पकड़ने के जाल, लाइनें और अन्य उपकरण - समुद्री जीवन के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करते हैं और हमारे महासागरों की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाते हैं। भारत जैसे विशाल तटीय रेखा वाले देश के लिए, जो अपनी समृद्ध समुद्री जैव विविधता और मत्स्य पालन पर निर्भरता के लिए जाना जाता है, इस समस्या को समझना और इसका समाधान खोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भूतिया जाल: एक अदृश्य खतरा

मछली पकड़ने के जाल, विशेष रूप से नायलॉन जैसे सिंथेटिक सामग्री से बने, अविश्वसनीय रूप से टिकाऊ होते हैं। दुर्भाग्य से, यही स्थायित्व उन्हें समुद्र में एक स्थायी समस्या बनाता है। जब ये जाल खो जाते हैं या त्याग दिए जाते हैं, तो वे महीनों, वर्षों या यहाँ तक कि सदियों तक समुद्र में घूमते रहते हैं। ये लगातार मछली पकड़ते रहते हैं, जिससे समुद्री जीवों को अत्यधिक पीड़ा होती है और उनकी मृत्यु होती है। कछुए, डॉल्फ़िन, व्हेल, समुद्री पक्षी और मछलियाँ इन जालों में फंस जाते हैं, जिससे वे डूब जाते हैं, भूखे मर जाते हैं या गंभीर चोटों से मर जाते हैं।

समुद्री कछुआ मछली पकड़ने के जाल में फंसा हुआ, जीवन के लिए संघर्ष कर रहा है।
समुद्री कछुआ मछली पकड़ने के जाल में फंसा हुआ, जीवन के लिए संघर्ष कर रहा है।Veg.ac · AI-generated illustration

आर्थिक और पारिस्थितिक लागत

भूतिया जाल केवल समुद्री जीवन के लिए ही हानिकारक नहीं हैं; वे तटीय समुदायों और मत्स्य पालन उद्योग के लिए भी एक महत्वपूर्ण आर्थिक बोझ हैं। ये जाल जहाजों के प्रोपेलर में उलझ सकते हैं, जिससे महंगा नुकसान हो सकता है। वे समुद्री पारिस्थितिक तंत्र को भी नुकसान पहुंचाते हैं, जैसे कि मूंगा चट्टानों को तोड़ना, जिससे मछलियों के प्रजनन स्थल नष्ट हो जाते हैं। चूंकि भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा मत्स्य पालन पर निर्भर है, खासकर तटीय राज्यों जैसे केरल, तमिलनाडु, गुजरात और पश्चिम बंगाल में, इसलिए समुद्री प्रदूषण का यह रूप हमारे खाद्य सुरक्षा और आजीविका को सीधे प्रभावित करता है।

10%
भूतिया जालों का अनुमानित प्रतिशत
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP)
46%
समुद्री प्लास्टिक कचरे में योगदान
यूरोपीय संसद अनुसंधान सेवा

भारत में स्थिति

भारत की 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा के साथ, समुद्री कचरे का मुद्दा विशेष रूप से गंभीर है। कई भारतीय तटीय क्षेत्रों में, विशेष रूप से छोटे पैमाने के मत्स्य पालन समुदायों में, खोए हुए या टूटे हुए जालों का प्रबंधन एक चुनौती है। ये जाल अक्सर समुद्र तटों पर बहकर आते हैं, स्थानीय समुदायों के लिए सफाई की एक अतिरिक्त समस्या पैदा करते हैं। इसके अतिरिक्त, नदियों और अन्य जलमार्गों से बहने वाला कचरा अंततः महासागरों में मिल जाता है, जिसमें मछली पकड़ने के उपकरण भी शामिल हो सकते हैं।

भारतीय तट पर खड़ी मछली पकड़ने वाली नावें, जहाँ प्लास्टिक प्रदूषण एक समस्या है।
भारतीय तट पर खड़ी मछली पकड़ने वाली नावें, जहाँ प्लास्टिक प्रदूषण एक समस्या है।Veg.ac · AI-generated illustration

डेयरी उद्योग का अप्रत्यक्ष प्रभाव

हालांकि यह सीधे तौर पर मछली पकड़ने के जाल से संबंधित नहीं है, लेकिन भारत में डेयरी उद्योग के विस्तार का अप्रत्यक्ष प्रभाव हो सकता है। पशुधन चारे के उत्पादन के लिए भूमि की आवश्यकता, और पशुओं के अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियाँ, अंततः जल प्रदूषण में योगदान कर सकती हैं जो महासागरों तक पहुँचता है। इसके अलावा, डेयरी उत्पादन में पानी की भारी खपत, जो अक्सर भूजल पर निर्भर करती है, उन जल संसाधनों पर दबाव डालती है जो तटीय पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। एक संपूर्ण वीगन जीवन शैली अपनाकर, हम न केवल समुद्री प्रदूषण के प्रत्यक्ष स्रोतों को कम करते हैं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से भी उन उद्योगों पर दबाव कम करते हैं जो जल और भूमि संसाधनों को प्रभावित करते हैं।

भूतिया जाल एक अदृश्य शिकारी की तरह हैं, जो हमारे महासागरों में अनगिनत समुद्री जीवों के लिए निरंतर खतरा बने हुए हैं।

समुद्री जीवविज्ञानी

समाधान की ओर कदम

इस समस्या का समाधान बहुआयामी है। इसमें शामिल हैं: बेहतर मछली पकड़ने के गियर प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देना, खोए हुए जालों की पहचान और हटाने के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास, और मछुआरों को जिम्मेदार प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना। वैश्विक स्तर पर, कई संगठन सक्रिय रूप से भूतिया जालों को हटाने और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र को बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। भारत में, सरकारी पहलों और गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से जागरूकता बढ़ाई जा रही है।

  • मछली पकड़ने के गियर के लिए बायोडिग्रेडेबल सामग्री का उपयोग।
  • मछुआरों के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम।
  • खोए हुए जालों को चिह्नित करने के लिए जीपीएस टैग का उपयोग।
  • समुद्र तटों और पानी से जालों को हटाने के लिए नियमित सफाई अभियान।
  • समुद्री कचरे के मुद्दे पर अनुसंधान और डेटा संग्रह।

समुद्री प्लास्टिक कचरे के स्रोत (अनुमानित प्रतिशत)

Unit: %
मछली पकड़ने के उपकरण46
अन्य प्लास्टिक (बोतलें, बैग, आदि)23
अनजान31

यह डेटा विभिन्न अध्ययनों और रिपोर्टों के आधार पर एक अनुमान है।

वीगन जीवन शैली का योगदान

एक वीगन जीवन शैली अपनाना, जिसमें मांस, मछली, डेयरी उत्पाद और अन्य पशु-व्युत्पन्न उत्पादों का बहिष्कार शामिल है, समुद्री प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मछली पकड़ने के उद्योग की मांग को कम करके, हम अप्रत्यक्ष रूप से भूतिया जालों की संख्या को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, वीगन आहार अक्सर स्थायी कृषि पद्धतियों से जुड़े होते हैं जो जल प्रदूषण को कम करते हैं, और यह डेयरी जैसे जल-गहन उद्योगों पर निर्भरता को भी कम करता है। स्थानीय, मौसमी सब्जियों, दालों और अनाजों पर ध्यान केंद्रित करने वाले वीगन आहार न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर हैं, बल्कि भारत में कई समुदायों के लिए अधिक किफायती और सुलभ भी हो सकते हैं।

समुद्री जल प्रदूषण में सिंथेटिक फाइबर का प्रतिशत

Unit: %
नायलॉन (जाल, लाइनें)35
पॉलीप्रोपाइलीन (रस्सियाँ, जाल)25
पॉलीथीन (पैकेजिंग, बैग)20
अन्य सिंथेटिक20

स्रोत: विभिन्न समुद्री प्रदूषण अध्ययन।

भविष्य की ओर देखना

समुद्रों में प्लास्टिक, विशेष रूप से मछली पकड़ने के गियर से, एक जटिल पर्यावरणीय चुनौती है। हालांकि, जागरूकता, नवाचार और सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से, हम इस समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर सकते हैं। एक वीगन जीवन शैली को अपनाना, जिम्मेदार उपभोग प्रथाओं का पालन करना, और स्थायी समाधानों का समर्थन करना - ये सभी ऐसे कदम हैं जो हमारे कीमती महासागरों को संरक्षित करने में मदद कर सकते हैं, जिससे वे आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और जीवंत बने रहें। भारत के समृद्ध समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना न केवल एक पर्यावरणीय अनिवार्यता है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और भविष्य की समृद्धि के लिए भी आवश्यक है।

समुद्र तट से प्लास्टिक कचरा हटाते स्वयंसेवक।
समुद्र तट से प्लास्टिक कचरा हटाते स्वयंसेवक।Veg.ac · AI-generated illustration

स्थानीय पहलें

भारत के विभिन्न तटीय राज्यों में, कई छोटे पैमाने के संगठन और सामुदायिक समूह समुद्री कचरे को कम करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। इनमें समुद्र तट की सफाई, मछुआरों के लिए जागरूकता शिविर और प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के लिए अभिनव समाधानों का विकास शामिल है। इन पहलों का समर्थन करना और उनमें भाग लेना, चाहे वह स्वयंसेवा के माध्यम से हो या दान के माध्यम से, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य पर वास्तविक प्रभाव डाल सकता है।

8-12 मिलियन टन
समुद्री प्लास्टिक कचरे का अनुमानित वार्षिक टन भार
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP)
गंभीर
समुद्री जीवन पर भूतिया जालों का प्रभाव
अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO)
समुद्री प्रदूषण के एक हिस्से के रूप में एकत्र किया गया कचरा, जिसमें मछली पकड़ने के उपकरण भी शामिल हैं।
समुद्री प्रदूषण के एक हिस्से के रूप में एकत्र किया गया कचरा, जिसमें मछली पकड़ने के उपकरण भी शामिल हैं।NOAA Marine Debris Program · Public domain · Wikimedia Commons

Sources & further reading

  1. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP)UNEP समुद्री कचरे पर रिपोर्ट
  2. यूरोपीय संसद अनुसंधान सेवा (EPRS)समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण पर ब्रीफिंग
  3. अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO)IMO समुद्री प्रदूषण को कम करने के दिशानिर्देश
  4. भारतीय मत्स्य पालन मंत्रालयतटीय मत्स्य पालन और पर्यावरण पर रिपोर्ट
  5. Nature Climate Changeसमुद्री प्लास्टिक पर सहकर्मी-समीक्षित अध्ययन